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उत्तराखंड

नौकरी छूटी -आजीविका का जरिया गेंदे के फूल को बनाया

धौलछीना (अल्मोड़ा)। कोरोना काल में नौकरी छूटने के बाद विपरीत परिस्थितियों में प्रवासी ने गांव में फूलों की खेती कर लोगों को रोजगार की राह दिखाई है। प्रवासी ने मेहनत और लगन से गेंदे के फूलों की खेती कर कमाई का जरिया खोज निकाला है। खेती कर उन्होंने नवरात्र के दौरान चितई मंदिर में स्टॉल लगाकर अच्छी कमाई भी की। अब लगन सीजन में भी अच्छा काम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

भैंसियाछाना के दशाउधनियान गांव निवासी भूपाल सिंह देहरादून में निजी कंपनी में कार्यरत थे। कोरोना के दौरान हुए लॉकडाउन में उनकी भी नौकरी छूट गई। घर लौटने के बाद  विपरीत परिस्थितियों में भी भूपाल ने हार नहीं मानी। लॉकडाउन में उन्होंने गेंदे के फूलों की खेती करने का निर्णय लिया।
भूपाल ने बताया कि अप्रैल में ही खेतों को तैयार करने का काम किया। जून में लॉकडाउन में छूट मिलने पर दिल्ली स्थित पूसा इंस्टीट्यूट से फूूलों के बीज लाए। जुलाई में लगभग सात से आठ हजार पौधे लगाए गए जो अब पूरे खिल गए हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र में चितई मंदिर में फूलों को बेचने के लिए स्टाल लगाया, जिससे अच्छी आय भी हुई। उन्हें उम्मीद है कि शादी-विवाह के सीजन में उन्हें फूलों का अच्छा आर्डर मिलेगा। भूपाल का कहना है कि पहाड़ में आधुनिक खेती को सरकार की थोड़ी मदद मिल जाए तो कई लोगों को यहां रोजगार मिल सकता है। इसके लिए किसानों को पॉलीहाउस, फूलों की प्रजाति के बीज और पौधे उपलब्ध करवाने की जरूरत है।

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