दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन के डिजाइन में काम आया नैनीताल एरीज के वैज्ञानिक का शोध

दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन यानि थर्टी मीटर टेलीस्कोप ‘टीएमटी’ परियोजना में देश के वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसमें नैनीताल एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे व भारतीय खगोल भौतिक संस्थान के निदेशक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमणियम के शोध पत्रों व अध्ययनों का उपयोग किया जा रहा है। नोबेल पुरुस्कार विजेता प्रो. एंड्रिया घेज के टीएमटी परियोजना में वैज्ञानिकों का बैक एंड उपकरणों और संभावित विज्ञान के लिए डिजाइन कार्य में भारत के दोनों वैज्ञानिक सहयोगी रहे हैं।
इस शोध कार्य को तैयार करने में भारत के दोनों वैज्ञानिकों डॉ. शशिभूषण पांडे तथा डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमणियम के शोध कार्यों व अध्ययनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। टीएमटी के डिजाइन को लेकर इन वैज्ञानिकों का अनुसंधान कार्य ब्रहमांड के अनसुलझे रहस्यों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
थर्टी मीटर टेलीस्कोप यानि टीएमटी का निर्माण हवाई द्वीप समूह के मौना की द्वीप पर 2011 से किया जा रहा है। टीएमटी परियोजना में दुनिंया के पांच देश शामिल हैं इसमें कनाडा, अमेरिका, चीन, भारत व जापान शामिल हैं। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2 बिलियन डॉलर है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह टेलीस्कोप हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में 12 गुना अधिक बेहतर रिज़ॉल्यूशन प्रदान करेगा। भारत भी परियोजना से जुड़े पांच देशों में एक है। टेलीस्कोप के निर्माण में भारत का योगदान 200 मिलियन डॉलर है जो प्रस्तावित योजना की लागत का करीब दसवां हिस्सा है। प्रस्तावित दूरबीन में करीब 492 पॉलिश किए गए दर्पणों की आवश्यकता होगी जिनमें से भारत को करीब 83 दर्पणों का निर्माण करना है।