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उत्तराखंड

दीपावली पर कब कब है शुभ मुहूर्त जानिए

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के तीन मुहूर्त होते हैं। इन्हें प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल कहा जाता है। प्रदोष काल 14 नवंबर को सूर्य अस्त के बाद होगा। दोपहर एक बजे से वृषभ लगन होगा। स्वाति नक्षत्र 8.09 बजे रात्रि तक रहेगा। सायं 5.09 बजे तक लाभ की चौघड़िया रहेगी। इसलिए शाम 5.30 से सायं 7.07 बजे तक गणेश पूजन और लक्ष्मी पूजन शुभ रहेगा।

निशीथ काल रात्रि 08 बजे से रात 10.50 बजे तक होगा। अमृत मुहूर्त रात 10.30 बजे से होगा। इसमें महालक्ष्मी पूजन, कनक धारा पूजन, लक्ष्मी की विशेष पूजा की जा सकती है। ज्योतिषाचार्य शुभाष चंद्र जोशी  ने बताया कि रात 8.50 से आधी रात बाद 1.33 बजे तक महानिशीथकाल माना जाएगा।  यह समय तंत्रमंत्र आदि सभी अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त है। लक्ष्मी पूजा के लिए सिंह लग्न, वृषभ लग्न बहुत ही उत्तम कहे गए हैं। लाभ की चौघड़िया बहुत शुभ मानी जाती है। दिवाली यदि शनिवार को पड़ जाए तो बाजार की दृष्टि से और भी शुभ मानी गई है।

धनतेरस के दिन 13 नवंबर को रात से समय यमराज को मनाने के लिए घर द्वार पर यम दीपक जलाना चाहिए।  14 नवंबर को 2.18 बजे के बाद अमावस्या आ जाएगी। पूरी रात अमावस्या रहेगी। अमावस्या तिथि पितरों की तिथि है। इसलिए दोपहर में अपने पितरों का पूजन करने के बाद गोधुली वेला में या किसी स्थिर लगन में गणेश पूजन, कलश पूजन, नव ग्रह पूजा करनी चाहिए।  13 नवंबर को धन तेरस, हनुमान जन्मोत्सव होगा। इसी दिन शाम को यम के लिए दिया जलाने से अकाल मृत्यु घर में नहीं होती है।  शुभाष चंद्र जोशी  ने बताया कि 14 नवंबर को छोटी दिवाली भी होगी। इस दिन सरसों या तिल का तेल शरीर पर लगाने का विधान है।   इस दिन रूप की देवी का जन्म दिवस भी होता है।

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