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उत्तराखंड

धनतेरस के दिन सायंकाल ये जरूर करें , बरसेंगी खुशियां

धनतेरस के दिन अकाल मृत्‍यु का भय दूर करने के लिए विशेष प्रकार से पूजा की जाती है। इस दिन यम दीपदान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। पूरे वर्ष में एक मात्र यही वह दिन है, जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा सिर्फ दीपदान करके की जाती है। कुछ लोग नरक चतुर्दशी के दिन भी दीपदान करते हैं। अर्थात कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन सायंकाल में घर के बाहर यमदेव के नाम से दीप रखने से अकालमृत्यु का निवारण होता है।
यमदीपदान प्रदोषकाल में करना चाहिए। इसके लिए आटे का एक बड़ा दीपक लें। गेहूं के आटे से बने दीप में तमोगुणी ऊर्जा तरंगें एवं आपत्ति लाने वाली तमोगुणी तरंगें शांत करने की क्षमता रहती है। स्वच्छ रुई लेकर दो लंबी बत्तियां बना लें। उन्हें दीपक में एक-दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुंह दिखाई दें। अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें। प्रदोषकाल में इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली, अक्षत एवं पुष्प से पूजन करें। उसके पश्चात् घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी-सी खील अथवा गेहूं से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रख दें। दीपक को रखने से पहले प्रज्वलित कर लें और दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए 4 मुंह के दीपक को खील आदि की ढेरी के ऊपर रख दें। ऊं यमदेवाय नमः कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें।

ज्योतिषाचार्य प0 पूरन चन्द्र त्रिपाठी
!!! शुभमस्तु !!!

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