खबरिया ब्रेकिंग न्यूज़ ---
आज उपराष्ट्रपति करेंगे बाबा नीम करौली के दर्---हल्द्वानी : शहर के 13 चौराहों के चौड़ीकरण पर डीएम---कुमाऊँसीएम योगी आदित्यनाथ कल हल्द्वानी में क---
अल्मोड़ा 

स्वामी विवेकानन्द की तपस्थली काकड़ीघाट- जानिए क्यों है विशेष

देवभूमि उत्तराखंड अध्यात्म का केंद्र है लेकिन यहां पर कुछ जगह ऐसी हैं जहां पर सकारात्मक ऊर्जा का भंडार है ऐसी ही एक जगह है काकडी घाट , जहां पर स्वामी विवेकानंद को अद्भुत ज्ञान की प्राप्ति हुई थी जिस ज्ञान को उन्होंने देश ही नही विदेशों में भी फैलाया , काकडी घाट स्थित कर्कटेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में पीपल के पेड़ के नीचे उनको दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी ।

यूं तो पूरा उत्तराखंड देवभूमि के नाम से जाना जाता है यहां कण कण में ईश्वरीय शक्ति विराजमान हैं ,लेकिन कुछ जगहों पर ज्ञान की अविरल धारा आज भी बह रही है , नैनीताल और अल्मोड़ा जिले के बीच बसा काकडी घाट गांव ज्ञान का केंद्र है , इसी जगह पूरी दुनिया को ज्ञान की राह दिखाने वाले स्वामी विवेकानंद को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी ।

बताया जाता है कि सन 1890 में हिमालय भ्रमण के लिए निकले स्वामी विवेकानंद को कोसी और शिरोता (शिप्रा) नदियों की संगम स्थली भा गई और वह यहां ऐसे ध्यान में खोए जिसने आगे चलकर पूरी दुनियां को राह दिखाई । अपनी इस अनुभूति को स्वामी जी ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो में पूरी दुनिया के सामने रखकर भारत का गौरव बढ़ाया था ,इसी गांव के रहने वाले पंडित अखिलेश कांडपाल बताते हैं कि यह स्थान ईश्वरीय शक्तियों का भंडार और सिद्ध स्थान है ,इसी जगह पर नीम किरौली महाराज का आश्रम भी है , यहां पूज्य संत सोमवार गिरी महाराज ने वट वृक्ष के नीचे तपस्या की थी जो वट व्रक्ष आज भी यहां मौजूद है , कर्कटेश्वर महादेव मंदिर में भगवान काल भैरव साक्षात विराजमान हैं ,जिन्होंने स्वामी जी को साक्षात दर्शन दिए थे और इसी पेड़ के नीचे उनको दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई कि संपूर्ण विश्व एक तथा अखंड है और सूक्ष्म परमाणु तथा विराट ब्रह्मांड दोनों की संरचना एक ही नियम के अनुसार हुई है , आगे चलकर स्वामी जी ने इस संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचाया ।

स्वामी जी की तपोस्थली रहा यह स्थान आज भी लोगों को अपनी ओर खींच रहा है देश विदेश से लोग यहां पर स्वामी विवेकानंद की ही तरह ज्ञान की अनुभूति को महसूस करने के लिए दूर-दूर से यहां पर आते हैं हालांकि जिस पीपल के पेड़ के नीचे स्वामी जी को ज्ञान प्राप्त हुआ था वह अब नहीं है उसकी जगह पर नया पीपल का पेड़ लगाया गया है यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इस स्थान पर बहुत ही शांति और ऊर्जा महसूस होती है ।

देवभूमि उत्तराखंड में ऐसे अनेकों स्थान है जहां पर कई महापुरुषों को ज्ञान की प्राप्ति हुई है , देश विदेश से लोग इन जगहों पर सुकून और शांति महसूस करने के लिए यहां पर आते हैं ,लेकिन ऐसे पावन स्थानों को सहेजकर रखने की बहुत आवश्यकता है ,जिसके लिए सरकार समेत हम सबको सार्थक प्रयास करने होंगे ।

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!