उत्तराखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे – कैग रिपोर्ट से पुष्टि

उत्तराखंड में पलायन को लेकर जब भी बात होती है तो स्वास्थ्य को लेकर चिंता सबसे पहले आती है कुछ दिनों के अंतराल में प्रदेश में कोई न कोई घटना होती है जो मन को झकजोर देती है , फिर भी कोई प्रयास नहीं होते है सब भगवान् भरोसे छोड़ दिया जाता है खुद प्रदेश के मुखिया को दूसरे प्रदेश में जाकर इलाज करना पड़ा
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल शनिवार को विधानसभा सदन में रखी गई कैग की जिला और संयुक्त चिकित्सालयों की लेखा परीक्षा से भी सामने आया। सामने आया कि जिला अस्पताल रेफरल सेंटर बन कर ही रह गए हैं। यहां संसाधनों से लेकर डाक्टरों, नर्सों, दवा, पैथोलॉजी जांच आदि की भारी कमी है। जहा पर थोड़ी बहुत मात्रा में है वहाँ पर सही तरीके से इस्तमाल भी नहीं किया जा रहा है।
रिपोर्ट में सामने आया कि सरकार अस्पतालों का प्रबंधन करने में भी असफल रही। भवन डाक्टर, नर्स आदि की कमी सामने आई इसके अलावा डॉक्टर द्वारा लापरवाही के मामले जिनमे प्रसव के दौरान मौत, गलत उपचार आदि , भी सामने आए है
हल यह है कि ओपीडी में परामर्श के लिए प्रत्येक रागी को औसत पांच मिनट का समय मिलतa है उन्हें मुफ्त में दवाएं नहीं दी जा रही हैं। जरूरी दवाओं की भारी कमी है और जो दवाएं हैं भी उन्हें बांटा नहीं जा रहा है। अस्पतालों को पता ही नहीं हैं कि उन्हें क्या दवाएं रखनी हैं और क्या नहीं। कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि उत्तराखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे है