नगर आयुक्त से भिड़े भाजपा विधायक
बीते मंगलवार को देहरादून नगर निगम के नगर आयुक्त गौरव कुमार और सल्ट विधायक महेश के बीच जमकर तू-तू मैं-मै हुई. इतना ही नहीं गाली गलौज भी हुई. जिससे माहौल गरमा गया. आरोप है कि विधायक जीना किसी परिचित का टेंडर से जुड़े मामले को लेकर अपने समर्थकों के साथ देहरादून नगर निगम पहुंचे थे. जहां उन्होंने हंगामा कर दिया. वहीं, देहरादून नगर आयुक्त गौरव कुमार का आरोप है कि उनके साथ अभद्रता और गाली गलौज की गई. इस मामले पर विधायक महेश जीना ने मामले में सफाई दी है. उधर, घटना के बाद नगर निगम के सफाई मजदूर संघ और नगर निकाय कर्मचारी महासंघ ने सभी काम ठप कर दिया है।
मंगलवार को सल्ट से भाजपा विधायक महेश जीना ने नगर निगम में जमकर हंगामा किया। आरोप है कि परिचित का टेंडर निरस्त होने पर विधायक ने पहले कर्मचारियों के साथ गालीगलौज की, इसके बाद कार्यालय में घुसकर नगर आयुक्त के साथ बदसलूकी और गालीगलौज की। विधायक के इस व्यवहार से नगर निगम कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। कर्मचारियों ने निगम का काम-काज ठप कर आज से सफाई सहित सभी कार्य ठप कर हड़ताल की घोषणा कर दी है। कर्मचारियों चेतावनी दी कि विधायक जब तक माफी नहीं मांगते तब तक कर्मचारी हड़ताल वापस नहीं लेंगे।
हाल ही में नगर निगम की ओर से सहस्रधारा रोड स्थित लीगेसी वेस्ट को खत्म करने के लिए टेंडर डाले गए थे। टेक्निकल बिड में पांच कंपनियां ही पहुंच पाई थीं। इसमें तीन कंपनियों को मानक पूरा न करने पर बाहर दिया था। बताया जा रहा है, इसमें से एक कंपनी सल्ट से भाजपा विधायक महेश जीना के परिचित की थी। टेंडर निरस्त होने से बौखलाए विधायक समर्थकों के साथ दोपहर बाद नगर निगम पहुंचे।
उधर इस मामले में विधायक सल्ट महेश जीना ने कहा कि उन पर बेवजह बदसलूकी का आरोप लगाकर मामले का तूल दिया जा रहा है। कहा कि उनके एक परिचित ने सहस्रधारा रोड स्थित लीगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए टेंडर डाला था। उसे निरस्त कर दिया गया। परिचित ने उनसे शिकायत की थी कि बिना कारण बताए निगम अधिकारियों ने अपने चहेतों को टेंडर दे दिया है।
उनकी शिकायत के बाद वह निगम पहुंचे थे। वहां पहुंचकर उन्होंने नगर आयुक्त को फोन किया, लेकिन उन्होंने सचिवालय में होने की बात कही। जब वह जहां टेंडर की फाइल रखी गई थी वहां पहुंचे और उनसे फाइल दिखाने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया। कहा कि जो उस समय उनसे बात कर रहा था वह कर्मचारी नहीं कोई और था।
जब उन्होंने आपत्ति की तो वह व्यक्ति नगर आयुक्त के कार्यालय में पहुंच गया। वहां जब उन्होंने नगर आयुक्त से टेंडर के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने मना कर दिया और उनके साथ तू-तड़ाक से बात की। कहा कि उन पर बेटे को टेंडर दिलाने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया। जबकि यह टेंडर उनके बेटे का नहीं बल्कि परिचित का था। इसकी पड़ताल भी की जा सकती है। आरोप लगाया कि निगम में अधिकारी भ्रष्टाचार में लगे हुए हैं। अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए अपने हिसाब से टेंडर की शर्तें तय करते हैं। इस पर उन्हें आपत्ति थी।
सीएम ने लिया संज्ञान गढ़वाल कमिश्नर को सौंपी गई जांच
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नगर निगम में हुए विधायक और नगर आयुक्त के बीच गरमा गर्मी के मामले का संज्ञान लिया है और मामले की जाँच गढ़वाल कमीशनर को सौपी गई है