खबरिया ब्रेकिंग न्यूज़ ---
आज उपराष्ट्रपति करेंगे बाबा नीम करौली के दर्---हल्द्वानी : शहर के 13 चौराहों के चौड़ीकरण पर डीएम---कुमाऊँसीएम योगी आदित्यनाथ कल हल्द्वानी में क---
अल्मोड़ा 

हर्षोल्लास के साथ मनाया गया खतडुआ

कुमाऊं का प्रसिद्व त्यौहार खतड़ुवा धूमधाम से मनाया गया।उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि व पशुपालन ही है।उत्तराखंड में वर्तमान में भी पशुपालन व कृषि से सम्बंधित कई त्यौहार मनाए जाते हैं, जिनमें खतडुवा भी एक मुख्य त्यौहार है,जो कि सिर्फ कुमाऊँ मंडल में मनाया जाता है।मान्यताओं के अनुषार खतडुवा शब्द की उत्पत्ति खातड़ शब्द से हुई है,जिसका अर्थ है-रजाई या अन्य गर्म कपड़े।सितंबर के मध्य से पहाड़ो में धीरे-धीरे ठंडा शुरू हो जाता है,यही वक्त है जब पहाड़ के लोग गर्मियों के कपड़े निकालकर धूप में सूखाते हैं और पहनना शुरू करते हैं।इस तरह यह त्यौहार वर्षा ऋतु की समाप्ति के बाद शीत ऋतु के आगमन का परिचायक है।इस त्यौहार के दिन गांव में लोग अपने गौशालाओं की साफ-सफाई करते हैं,पशुओं को नहला-धुला कर उनकी सफाई की जाती है और पशुओं को बीमारी से दूर रखने के लिए भगवान से प्रार्थना की जाती है।गाँव के बच्चे,महिलाएं,बुजुर्ग आदि लोग शाम के समय अंधेरा होते वक्त एक जगह पर लकड़ी अथवा पिरूल का एक बड़ा ढेर लगाते हैं और उसे जलाते हैं।खतडुवा में लोग एक-दूसरे को ककड़ी प्रसाद के रूप में देते हैं।यह कुमाऊँ का परम्परागत त्यौहार है।खतड़वा जलाते वक्त लोगों के द्वारा लोकोक्ति कही जाती है ।

भैलो खतडुवा भैलो
गाय की जीत,खतडुवा की हार
भाग खतडुवा भाग

वैसे तो खतड़ुवा त्यौहार के पीछे कई मत है,लेकिन यहाँ के बूढ़े बुजुर्गो द्वारा यह भी कहा जाता है कि कई वर्ष पूर्व कुमाऊँ तथा गढ़वाल के बीच युद्ध हुआ जिसमें कुमाऊँ का नेतृत्व गैंडा सिंह तथा गढ़वाल का नेतृत्व खतड़ सिंह कर रहा था।इस युद्ध में खतड सिंह हार गया तभी से कुमाऊं मंडल में खतडुवा मनाया जाने लगा लेकिन इसका कोई भी ऐतिहासिक प्रमाण और उल्लेख इतिहास में देखने को नहीं मिलता। लेकिन उत्तराखंड की स्थापना के साथ  धीरे धीरे यह त्योहार प्रतीक मात्र रह गया है

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!