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उत्तराखंड

योग आध्यात्म का सबसे बड़ा केंद्र चौरासी कुटिया -पर्यटकों से गुलजार हुई

ऋषिकेश. राजाजी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट स्थित महर्षि महेश योगी  की कर्मस्थली चौरासी कुटिया (Chaurasi Kutia)  कोराना वायरस के संक्रमण के चलते छह महीने से बंद पड़ी चौरासी कुटिया पर्यटकों के लिए फिर से खुल गई है. इसके बाद पर्यटक इसका दीदार करने के लिए पहुंचने लगे हैं. विश्वभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही महर्षि महेश योगी की चौरासी कुटिया को ऋषिकेश में योग का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां से निकल कर योग पूरे विश्व में फैला था. यह आश्रम उत्तराखंड में एक ऐसी धरोहर है, जिसके दीवाने पूरे विश्व में फैले हुए हैं. विदेशियों की जुबान पर ऋषिकेश के बीटल्स आश्रम का नाम एक आम बात है. लगभग छह महीने बाद कोराना यह विरासत आम आदमी के लिए खोल दी गई है

यहां ध्यान के लिए वर्ष 1957 में किया था आश्रम का निर्माण
योगगुरु महर्षि महेश योगी ने पार्क क्षेत्र में योग, ध्यान के लिए वर्ष 1957 में यहां आश्रम का निर्माण किया था। वन विभाग से लीज में भूमि लेने के बाद योगगुरु ने यहां भावतीत और योगध्यान के लिए योग नगरी का निर्माण किया।  लगभग वर्ष 1984 में योगगुरु यह आश्रम छोड़कर नीदरलैंड चले गए। पार्क प्रशासन ने फिर इस पर अपना स्वामित्व जमा दिया।   साठ के दशक में बसाए गए शंकराचार्य नगर चौरासी कुटिया को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. लेकिन सरकार की नीतियों में उपेक्षित रहने की वजह से चौरासी कुटिया अब खंडहर में तब्दील होती जा रही है. नतीजतन यहां पहुंचकर भी दर्शकों को सिर्फ खंडहरों के ही दर्शन हो पाते हैं. यहां पहुंचने वाले पर्यटक अब सरकार से इस विरासत को संभालने की मांग कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को पहचान दिलाने वाली है नगरी आने वाली पीढ़ी को अतीत की याद दिला सके. यहां का आध्यातिक वातावरण यहां पहुंचने वालो को अलग सुकून देता है.   सरकार इस ओर ध्यान दे तो आने वाले दिनों में विदेशी पर्यटक भी अतीत के इस विरासत का मजा ले सकते हैं.

चौरासी कुटिया में प्रवेश के लिए पार्क प्रशासन ने पर्यटकों के लिए शुल्क निर्धारित किया है। यहां विदेशी पर्यटकों के लिए छह सौ और देशी पर्यटकों के लिए तीन सौ रुपये शुल्क है। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के लिए दो सौ रुपये शुल्क निर्धारित किया हुआ है।

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