पर्यटन व्यवसाइयों के आगे रोजी रोटी का संकट
कोरोना के चलते हुए लॉक डाउन के बाद जब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई तो सरकार ने पर्यटन ब्यबसाय में रियायत देने का फैसला लिया, जिसके बाद उम्मीद की जा रही थी की उत्तराखंड में पर्यटन गतिविधियां बढेंगी लेकिन बाबजूद इसके पर्यटन ब्यबसाय रफ़्तार नही पकड़ पा रहा है, और उनके आगे आर्थिकी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है । उत्तराखंड में पर्यटन आर्थिकी का मजबूत जरिया है, देश विदेश से लोग यहां घूमने आते हैं, लेकिन कोरोना ने इस बार पर्यटन कारोबार को बिल्कुल चौपट कर दिया है , सरकार ने अब पर्यटन के लिहाज़ से गाइडलाइंस जारी की लेकिन पर्यटक कुमाऊँ की तरफ नही आ पा रहे हैं, मुक्तेश्वर, शीतला, भीमताल नैनीताल ,में इस बार अभी तक सन्नाटा पसरा हुआ है, पर्यटन ब्यबसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक इस साल शुरू से ही उम्मीद थी की पर्यटन ब्यबसाय अच्छा उछाल लेगा लेकिन कोरोना काल में सब चौपट हो गया, जिस तरह के हालात हैं वो दिसम्बर जनवरी के लिहाज़ से भी अच्छे नजर नही आ रहे हैं, चांफी क्षेत्र में बने होम स्टे मालिक पूरन चन्द्र त्रिपाठी और पूनम मेहरा बताते हैं कि उनके पास बहुत कम इंक्वायरी आ रही हैं , अगर ऐसे ही रहा तो उनके आगे रोजी रोटी का संकट गहरा जायेगा । जबकि मुक्तेश्वर के रिजॉर्ट स्वामी दीपक बिष्ट और भुवन भक्त ने सरकार से पर्यटकों के आवागमन पर और अधिक ढील देने की बात कही है । स्थानीय लोग भी मानते हैं की पर्यटन कारोबार पर कोरोना का बड़ा प्रभाव पड़ा है, क्योंकि पर्यटकों के आने से एक साथ कई लोगों को रोजगार मिल जाता था, स्थानीय उत्पादों को भी मार्केट मिलता था , पहाड़ी इलाको में बने होम स्टे में पर्यटक ठहरना ज्यादा पसन्द करते लेकिन इस बार सब खत्म सा हो गया है, लिहाज़ा सरकार को पर्यटन के लिहाज़ से कुछ अलग सोचने की जरूरत है । जिस तरह के हालातों का सामना अभी पर्यटन ब्यबसाई कर रहे हैं उससे नही लगता की अक्टूबर से लेकर फ़रवरी तक पर्यटन सीजन रफ़्तार पकड़ पायेगा,जो उत्तराखंड के पर्यटन ब्यवसाइयों के लिए अच्छे संकेत नही हैं।