उत्तराखंड को देश के शीर्ष तीन पर्यटन स्थलों में शामिल करेंगे- सीएम त्रिवेंद्र
आज उत्तराखंड अपना 21वां जन्मदिन मना रहा है। कोरोना की काली छाया का बड़ा प्रभाव यहाँ भी दिखा कोरोना काल की दुश्वारियों ने राज्य के औद्योगिक और पर्यटन कारोबार की कमर तोड़ दी। लाखों लोग काम-धंधा छोड़कर उत्तराखंड अपने गांवों में लौटे हैं। ये सभी रोजगार और आजीविका की चिंता में डूबे हैं। इन चौतरफा चुनौतियों से घिरे राज्य को उबारने का जिम्मा प्रदेश सरकार के कंधों पर है।
मुख्या मंत्री रावत ने कहा पिछले बीस वर्षों में उत्तराखंड में काफी विकास हुआ। राज्य की व्यावहारिक औद्योगिक नीति से उत्तराखंड में बड़ी मात्रा में निवेश हुआ। इन नीतियों से वर्ष 2015-2021 के मध्य राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) की वार्षिक वृद्धि दर 10.62 प्रतिशत रही। इसका आकार 2.93 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने की उम्मीद है। प्रतिव्यक्ति आय भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।
वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती के सन्दर्भ में उन्होंने कहा की पर्यटन और उद्योग हमारा प्रमुख सेक्टर है। ये राज्य की तरक्की और रोजगार दोनों का आधार है। कोरोना काल में यह बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसे दोबारा पटरी पर लाना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौतीहै। हम मानते हैं कि यह अस्थाई संकट है। हम एडवेंचर और वेलनेस टूरिज्म के जरिए राज्य को एक वैश्विक पर्यटन स्थल बनाना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य को देश के शीर्ष तीन पर्यटन स्थलों में स्थान दिलवाना है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बोले-भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। सरकार में आते ही बड़ी कार्रवाई शुरू की। एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाला इसका उदाहरण है। इसमें किसी को नहीं बख्शा गया। कई लोग जेल गए। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जंग लगातार जारी है। हमने उत्तराखंड का सचिवालय और मुख्यमंत्री आवास को दलालों और माफिया से मुक्त कराया। सभी भ्रष्ट माफिया लोग हैं। अपने हितों पर चोट लगने से वे एकजुट हो रहे हैं। वे सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं। तमाम तरह की धमकियां दे रहे हैं। लेकिन भ्रष्टाचारियों के सामने न झुके हैं न झुकेंगे। यह हमारा वादा है कि इनको कभी सरकार में लिप्त नहीं होने देंगे। हमने सत्ता संभालते समय यह वादा किया था कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन देंगे और भ्रष्टाचार मुक्त विकास करेंगे। हमने खनन, निर्माण, वन और शराब के अवैध धंधे से पोषित हो रहे भ्रष्ट माफिया की कमर तोड़ी है।
हमारी सरकार ने सुशासन की दिशा में कई कार्य किए। सचिवालय में ई ऑफिस शुरू किया ताकि फाइलों को ट्रैक किया जा सके। सीएम डैश बोर्ड बनाया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर दिया। 1905 पर दर्ज शिकायतों का समाधान तब तक नहीं माना जाता जब तक शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हो जाता। उन्होंने कहा की हमारी सरकार आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित राज्य के रूप में देख रही है। इसके लिए, हमने दस साल का विजन 2030 पेपर भी तैयार किया है। इसमें शिक्षा और कौशल विकास, उद्योग, पर्यावरण, बुनियादी ढांचा, कृषि, पर्यटन, स्वास्थ्य और परिवहन सेक्टर पर फोकस होरहा है। आलवेदर रोड, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग, चारधाम रेल कनेक्टिविटी और हेली सेवाओं का विस्तार आने वाले वर्षों में राज्य के तीव्र विकास के मजबूत आधार बनेंगे। हमने कर्मचारियों के मसलों पर संवाद का सिलसिला शुरू किया। पहली बार रिकार्ड विभागीय पदोन्नतियां हुईं। हमने आशा कार्यकर्ता के बारे में सोचा। उनका मानदेय तीन गुना बढ़ाया। हमारा पूरा जोर कृषि, बुनियादी ढांचे और उद्योगों के विकास पर है। हम ऊर्जा विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारी योजना कृषि में विविधता को बढ़ावा देने की है। हम बागवानी, सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती पर जोरदेने की योजना बना रहे हैं। आय बढ़ाने के लिए पशुपालन को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम कर रहे हैं ताकि रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। हाइड्रोपावर सरकारी नीति के केंद्र में है। हमने राज्य को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष पर ले जाने का लक्ष्य रखा है। सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बढ़ावा देने की योजना बना रहे हैं।
उत्तराखंड कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए शीर्ष तीन राज्यों में से एक रहा है। शुरुआत से हमारी तैयारियां रही हैं। इसने हमें किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार किया है। हमने राज्य में वेंटिलेटर की कमी को दूर किया। डॉक्टरों, प्रशिक्षित पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती की है। हमने न केवल रोगियों की संख्या को बढ़ने से रोका, बल्कि चिकित्सा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया।