बांध परियोजनाएं उत्तराखण्ड के हित में नही – जल पुरुष
लम्बे समय से वैज्ञानिक, एक्सपर्टस औऱ पर्यावरणविद जिस खतरे से आगाह करने की कोशिश कर रहे थे वही खतरा तबाही का मंजर बन रविवार के दिन उत्तराखंड के चमोली में सामने आया, पर्यावरणविद शुरू से ही बांध परियोजनाओं को उत्तराखंड के हित मे नही बता रहे हैं, नतीजतन यही हुआ की उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर के टकराने से इतना बड़ा हादसा हुआ । 
उत्तराखंड में बांध बनाने का विरोध पहले से ही ग्रामीण करते आ रहे हैं, लेकिन हमेशा आम जनता के इस विरोध की अनदेखी हुई तो नतीजे सामने आने लगे हैं.. कुछ दिन पहले मैगसेसे अवार्ड से सम्मानित और जल पुरुष के नाम से बिख्यात राजेंद्र सिंह ने इस बात को सामने रख दिया था कि उत्तराखंड में बड़े बांधों की कोई आवश्यकता नहीं है, उत्तराखंड में चाल खाल और छोटे तालाब जैसी योजनाएं बनाकर पानी को रोका जा सकता है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया था की आधुनिक जरूरत के हिसाब से चाल खाल जैसी परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सकता है जिससे हमारे पहाड़ सुरक्षित रह सके और बड़ी आपदाओं से आसानी से निपटा भी जा सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उत्तराखंड में बड़े उद्योग धंधे प्रकृति के लिए अच्छे नहीं हैं, प्रदूषण से लेकर अन्य कई तरह की समस्याएं हैं जो बड़े उद्योग धंधों और बड़े बड़े प्रोजेक्टों से उत्पन्न हो रही है, जिसके चलते प्रकृति का संरक्षण करना बेहद जरूरी है, इसलिए उत्तराखंड में विकेंद्रित जल प्रबंधन की आवश्यकता है।