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हिमालयी क्षेत्रो में तबाही मचाएंगे टूटे और लटके हुए ग्लेशियर

ग्लोबल वार्मिंग व मानव हस्तक्षेप बढ़ने से  हिमालयन क्षेत्र में पड़ने वाले ग्लेशियर कमजोर हो रहे हैं। बढ़ते तापमान से ग्लेशियर पिघल रहे है   ज्यादातर ग्लेशियर में  ठोस बर्फ की अधिकता का प्रतिशत कम हो रहा है। व कुछ  ऐसे ग्लेशियर भी हैं जिसमें बीच-बीच में बर्फ का घनत्व कम हो चुका है। ऐसी स्थिति में ये ग्लेशियर अपने सपोर्ट को खो रहे हैं और  लटके हुए  हैं। ऐसे ग्लेशियर कभी भी भारी तबाही मचा सकते हैं। हिमालयन क्षेत्र  में बर्फ पर नजर रखने वाली एजेंसी “स्नो एवलांच स्टडी एंड एस्टेब्लिशमेंट” की ऑब्जर्वेशन में ऐसी बातें निकल कर सामने आई हैं।

डॉ अश्वघोष गंजू (स्नो एवलांच स्टडी एंड एस्टेब्लिशमेंट के पूर्व निदेशक) कहते हैं कि हिमालयन क्षेत्र  के ग्लेशियर लाखों टन वजनी बर्फ का भार नहीं झेल पा रहे हैं। उनका कहना है  कि या तो ज्यादातर ग्लेशियर फ्रेक्चर्ड हैं या फिर हैंगिंग पोजीशन में आ चुके हैं।

इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है। बर्फ पर नजर रखने वाली टीम ने पाया कि ज्यादा तापमान के चलते ग्लेशियर की बर्फ बीच-बीच से पिघल रही है। यही एक प्रमुख कारण है कि ग्लेशियर टूट रहे हैं और लटक भी रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है ऐसे ग्लेशियर बेहद खतरनाक होते हैं।

लटकने एवं टूटने की वजह से यह पूरी तरह से नदियों में जाकर बहुत तेज वेग के साथ समा जाएंगे। हजारों लाखों टन के ग्लेशियर जब अपने तीव्र वेग से नीचे जाएंगे, तो ये नदियां रास्ता बदल देंगी। पलक झपकते  मानव निर्मित विकाश को बर्बाद कर देगी

इसलिए बहुत जरूरी है कि हम सबको मिलकर ना सिर्फ अपने ग्लेशियरों को बचाना है बल्कि बढ़ते हुए तापमान को रोकने के लिए जो मानवीय प्रयास किए जाने चाहिए वह हर संभव तरीके से किए जाएं। इसके लिए सभी सरकारों को आगे आना ही होगा। क्योंकि प्रकृति से छेड़खानी बहुत महंगी पड़ेगी।

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