हल्द्वानी वन अनुसन्धान केंद्र में खिला ट्यूलिप ,जलवायु परिवर्तन का दिखा असर

उत्तराखंड कुमाऊं के उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्यूलिप के लिए वातावरण अनुकूल है, मगर ट्यूलिप को उगाने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं हुए हैं। इसे देखते हुए वन अनुसंधान केंद्र हलद्वानी ने ट्यूलिप को राज्य में उगाने का प्रयोग किया है और इस प्रयोग के सफल नतीजे भी सामने आए हैं। लेकिन इस बार पिछले सालों की अपेक्षा इस बार ट्यूलिप कम औऱ लम्बे समय बाद खिला है, जिसका कारण जलवायु परिवर्तन समझा जा रहा है। 
ट्यूलिप के रंग बिरेंगे फूलों की ये तस्वीरें हलद्वानी वन अनुसंधान केंद्र की हैं…हल्द्वानी में पिछले 2 सालों में ट्यूलिप अपने सही समय पर खिला लेकिन इस बार ट्यूलिप अभी अंकुरित भी सही से नही हो सका, औऱ ट्यूलिप के जो फूल आये वो साइज में काफी छोटे हैं, माना जा रहा है की इस बार बर्फवारी औऱ बारिश बेहद कम हुई है, जिसका असर यह पड़ा की सीजन में ट्यूलिप अपने रंगों की छटा ज्यादा नही बिखेर सका, ट्यूलिप पर वन विभाग के शोध में हल्द्वानी और मुनस्यारी में किया गया प्रयोग 90 फीसदी सफल रहा है। वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के मुताबिक अगले 2 सालों में ट्यूलिप पर अभी और शोध किया जाएगा…जिसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकेगा, ट्यूलिप को उत्तराखंड के अंदर कैसे बेहतर रूप में विकसित किया जा सकता है और क्या आगे ट्यूलिप पर कुछ अन्य शोध और करने की जरूरत है,उनके मुताबिक अभी तक जो परिणाम उनके सामने ट्यूलिप को लेकर आए हैं उनमें जलवायु परिवर्तन को ट्यूलिप के लिए सबसे अहम कारक माना जा रहा है जिसके वजह से ट्यूलिप इस बार ठीक से नहीं खिल पाया।
वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर मदन सिंह बिष्ट के मुताबिक टूलिप के पुष्प विगत तीन वर्षों से हल्द्वानी वन अनुसंधान केन्द्र में उगाया जा रहा है, ट्यूलिप इस वर्ष अन्य पूर्व के दो वर्षों की तुलना में देर से खिला और फूल का साइज़ भी छोटा मिला, लिहाज़ा ट्यूलिप के इस वर्ष देर से खिलने का कारण सर्दी मे ठंडा कम होना यानी जलवायु परिवर्तन के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।
मौसम में बदलाव पूरे विश्व के लिये बड़ी चिंता का विषय है, जिसका असर उच्च हिमालयी क्षेत्रो में जैव विविधता पर साफ नजर आने लगा है, अधिकारियों ने चिंता जताई है कि मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से कई ऐसी वनस्पतियों और प्रजाति को नुकसान हो सकता है जो जैव विविधता के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। फिलहाल ट्यूलिप का देर से खिलना औऱ फूल का साइज छोटा होने का कारण मौसम में बड़ा बदलाव माना जा रहा है जो अब शोध का विषय है।