जंगलों में लगी आग बेकाबू , वन बिभाग के पास नही है स्टाफ
जंगलों में लग रही आग से उत्तराखंड बेहाल हो गया है, नैनीताल, अल्मोड़ा, टिहरी चमोली में जंगल धू धू कर जल रहे हैं, बेशुमार वन संपदा ख़ाक हो रही है, संसाधनों व स्टाफ की कमी से जूझ रहा विभाग पुलिस व ग्रामीणों की मदद से जैसे-तैसे आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है मगर वन कर्मियों की कमी के कारण विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।वन संरक्षक जीवन चन्द्र जोशी के मुताबिक पश्चिमी वन वृत्त के 5 वन प्रभागों में 47 वनाग्नि की घटनाएं अभी तक सामने आई हैं, वेस्टर्न सर्कल में रामनगर, हल्द्वानी तराई पूर्वी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग आता है इन डिवीजन में गौला और शारदा व कोसी दाबका जैसी खनन नदियों होने के के साथ लकड़ी कटान का काम भी किया जाता है 47 वनाग्नि की घटनाओं से 75 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है, अधिकारियों के मुताबिक स्टाफ़ की बेहद कमी है जिसकी वजह से आसानी और तत्काल घटनास्थल पर पहुंचना सम्भव नही हो पाता। लिहाज़ा मास्टर कंट्रोल रूम के ज़रिए आग की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है।
जंगलो में लगी आग से सबसे बड़ा नुकसान वन संपदा को तो हो ही रह है, इसके अलावा जंगलो में लगी आग गांव तक आ पहुंची है जिससे कई जगह गेहूं की खड़ी फसल जलकर तबाह ही गयी है, स्थानीय लोगो ने चिंता जताई है की यदि समय रहते आग पर काबू नही पाया गया तो ग्रामीणों के लिये खतरा और बढ़ता चला जायेगा। कई ग्रामीणों की शिकायत यह है कि जब वन अधिकारियों को आग की घटना की सूचना दी जाती है तो वो दूसरे रेंज का मामला बताकर अनसुना करते हैं ।
अपनी संपन्न वन सम्पदा के कारण उत्तराखण्ड का देश के पर्यावरणीय संतुलन में बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन आज दुनिया के इस बेशकीमती पारिस्थितिकी तंत्र को लचर सरकारी नीतियों और नौकरशाही की नजर लग गयी है जिसकी वजह से हर साल हजारों हैक्टेयर वनों और जैव विविधता को नुक्सान पहुँचाने वाले दावानल की रोकथाम करना राज्य सरकार के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रहा है ।