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उत्तराखंड,  नैनीताल

मूलभूत सुविधाओ से वंचित कालाढूंगी विधानसभा का ये गाँव

उत्तराखंड राज्य को गठन हुए 20 साल पूरे होने को हैं, लेकिन इतने वषो के बाद भी प्रदेश वासियों के बीच यह सवाल अभी भी बरकरार है कि जिन सपनों को लेकर उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था,  क्या प्रदेश उन नीतियों पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन शायद हकीकत इससे बहुत परे है, क्योंकि राज्य के विकास के तमाम दावों के बावजूद भी आज कुछ ऐसी तस्वीरों से सामने आ रही है  जहां  लोग आज भी सड़क , शिक्षा , पानी , बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं के लिये लड़ रहे हैं, या यूं कहें की मूलभूत समस्याओं से निपटने के लिए सरकार के सामने गुहार लगा रहे हैं लेकिन हालत जस की तस है,

भीमताल विकासखंड का सूर्या गांव भा0ज0पा0 के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के कालाढूंगी विधानसभा का दूरस्थ गाँव है, भीमताल-हलद्वानी मुख्य सड़क से मार्ग 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन  इस गांव में सड़क, पानी,  शिक्षा,   स्वास्थ्य की सुविधा   नहीं है, ग्रामीण कहते हैं कि 20 साल का उत्तराखंड हुआ लेकिन मंत्री विधायक और अधिकारियों ने इस गाँव का रुख नहीं किया, अब समस्या किसको कहें, अपनी आपबीती किसको सुनाएं, कभी-कभार चुनाव के दौरान वोट मांगने जनप्रतिनिधि आ गए तो अच्छी बात है, नहीं आए तो कोई बात ही नहीं |

मुख्य सड़क से आप जैसे तैसे सूर्या गांव तो पहुंच जाएंगे लेकिन उसके बाद जो नजारा देखेंगे वह आप को अभिभूत कर देगा, सातताल की दूरी सूर्या गांव से मात्र 10 मिनट की है जो पर्यटन के लिहाज से बहुत अच्छा है, सरकार अगर पर्यटन की नीतियों में लचीलापन करती तो शायद यहां एक अच्छा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन सकता था, लेकिन गांव वाले बताते हैं कि पिछले कई  महीने से गुलदार  का आतंक  पूरे गांव और उसके आसपास के इलाके में बना हुआ है, क्या दिन, क्या रात, क्या सुबह और क्या शाम, गुलदार  कहीं भी कभी भी दिख जाता है, शाम होते ही लोग घरों में दुबक जाते हैं, जिन लोगों को रोजगार के नाम पर मजदूरी करनी हो घर जल्दी लौट आते हैं, कई बार वन विभाग से गुहार लगाई की गुलदार  के खौफ से निजात दिला दो लेकिन वन विभाग में सिवाय पटाखे देने के अलावा एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया, इस रवैये के बाद ग्रामीण घरों में दुबक जाने को मजबूर है, स्वास्थ्य के नाम पर गांव के आसपास कोई अस्पताल नहीं है, कभी कोई बीमार पड़ गया तो उसे भीमताल औऱ हल्द्वानी ले जाने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता, गांव में स्कूल है लेकिन आठवीं क्लास तक है, उसके बाद गांव के  हर बच्चे को भीमताल जाना है, हमने लोगों से जाना की अंतिम बार अपनी विधायक या मंत्री जी से कब मिले थे ? तो उन्हें याद ही नहीं, शायद वोट मांगने के बाद उनके जनप्रतिनिधि ने कभी उनकी सुध लेने की कोशिश ही नहीं की,

भले ही उत्तराखंड को अलग राज्य बने 20 साल पूरे होने  को है लेकिन हकीकत यही है कि विकास के नाम पर सरकारे आज तक केवल जनता को छलती आई है और  ग्रामीण बिना शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा के जी रहे हैं, क्या शहीदों के सपनों का यही उत्तराखंड है? शायद इसका जवाब आज राज्य के उन जनप्रतिनिधियों के पास भी नहीं है उत्तराखंड राज्य के बेहतर विकास का ढिंढोरा जनता के बीच लगातार पीट रहे हैं ।

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