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उत्तराखंड

एलीफेंट रिजर्व को खत्म करने का प्रस्ताव दुर्भाग्यपूर्ण

इंसान तो इंसान अब गजराज भी सरकार से परेशान

कॉंग्रेस प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के एलीफेंट रिजर्व को खत्म करने के प्रस्ताव पर तलक टिप्पणी की है , उन्होंने कहा कि सरकार व मंत्री गण अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। नीतिगत व विकास परक निर्णय लेने में विफल रही वर्तमान सरकार ने प्रदेश को गर्त में धकेलने का काम कर रही है। जिसका परिमाण सरकार द्वारा विकास परियोजनाओं के नाम पर शिवालिक सहित प्रदेश में 14 एलीफेंट रिजर्व को खत्म करने का प्रस्ताव स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड मैं रखा जाना है।जिससे उत्तराखंड का वन्य क्षेत्र कम हो जाएगा और कई वन प्राणी भी विलुप्त हो जाएंगे।सरकार को चाहिये कि वन व वनसंपदा का एक बिसनेस माडल विकसित करे जिससे वन सम्पदा व वन प्राणी की सुरक्षा के साँथ- साँथ राज्य की आय व रोज़गार को बढ़ाया जा सके।
हैरानी की बात तो यह है 60000 करोड़ के क़र्ज़ में डूबी सरकार को जहाँ कर्मचारियों की तनख्वा देने में पासीने निकल रहे हैं , वही चुनाव सामने देख विकास की बात गले से नीचे नही उतर रही है।
दीपक बल्यूटिया ने कहा की पूरे भारतवर्ष में उत्तराखंड की पहचान वन क्षेत्र और वन संपदा को लेकर है और उत्तराखंड वनस्पति व वन प्राणी के बल पर प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदल सकते हैं जिसे सरकार खत्म करने पर तुली है।
दीपक बल्युटिया ने कहा हाथी का वजन 4 से 5 टन तक हो सकता है और जिसे 200 से 300 किलो प्रतिदिन चारे की आवश्यकता होती है जिसके लिए बड़े वन क्षेत्र की आवश्यकता है। हाथी का अनुवांशिक गुण है कि वह कभी भी उसके जन्म के परिवार के भीतर प्रजनन नहीं करता है। प्रजनन व भोजन के लिए हाथी एक वन से दूसरे वन मैं एलीफेंट कॉरिडोर के द्वारा जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN ) द्वारा हाथी को विलुप्त होने वाली प्रजाति (एंडेंजर्ड प्रजाति) मैं सम्मिलित किया गया ।एलिफ़ेंट कॉरिडोर्स के खत्म होने से वनो के साथ-साथ हाथी संरक्षण को भी ख़तरा है।
विकास के नाम पर हाथियों के निवास व कॉरिडोर्स मैं मानव अतिक्रमण व हाथी की रक्षा के लिए भारत सरकार के पर्यावरण व वन मंत्रालय द्वारा सन 1992 मैं हाथी परियोजना (project elephant) लागू की लेकिन राज्य सरकार इसके विपरीत काम कर रही है।
दीपक बल्यूटिया ने कहा कि एलीफ़ेंट कोरिडोर हाथी का मौलिक अधिकार है। सरकार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर 2020 के फैसले का संज्ञान लेते हुए तुरन्त एलीफेंट रिजर्व को खत्म करने के प्रस्ताव वापस लेना चाहिए।,सरकार को चाहिये कि वन व वनसंपदा का एक बिसनेस माडल विकसित करे जिससे राज्य की आय व रोज़गार को बढ़ाया जा सके।

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