खबरिया ब्रेकिंग न्यूज़ ---
आज उपराष्ट्रपति करेंगे बाबा नीम करौली के दर्---हल्द्वानी : शहर के 13 चौराहों के चौड़ीकरण पर डीएम---कुमाऊँसीएम योगी आदित्यनाथ कल हल्द्वानी में क---
उत्तराखंड,  विशेष खबर 

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 20 साल अभी भी स्थाई राजधानी का पता नहीं , जानिए क्यों

राज्य स्थापना की वर्षगांठ के बहाने स्थायी राजधानी का मुद्दा एक बार फिर गर्माने लगा है। झारखंड और छत्तीसगढ़ के साथ 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आए इस पर्वतीय राज्य की स्थायी राजधानी की कहानी 20 साल बाद भी अधूरी है। आज उत्तराखंड देश का अकेला ऐसा राज्य है जिसमें दो विधानसभा भवन हैं और तीसरा बनाने की तैयारी है, लेकिन स्थायी राजधानी का कुछ पता नहीं। वर्तमान सरकार के ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद कांग्रेस ने सत्ता में आने पर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की घोषणा की है। उसने भी यह घोषणा तब की जब वह विपक्ष में है। सत्ता में रहते हुए यह मौका उसके पास भी था, लेकिन तब इस पर अमल नहीं किया। 
राजधानी के लिए कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियां भाजपा को ही गुनहगार ठहराती हैं। उनका मानना है कि राज्य गठन के समय झारखंड और छत्तीसगढ़ की राजधानी तय हो गईं तो तत्कालीन भाजपा सरकार ने उत्तराखंड की स्थायी राजधानी पर फैसला क्यों नहीं लिया। इसके स्थान पर देहरादून को अस्थायी राजधानी बना दिया गया, जनभावनाओं की प्रतीक गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी में 20 साल लग गए। स्थायी राजधानी तय न करने का लांछन यदि भाजपा पर लगता है तो गैरसैंण को ग्रीष्मकाली राजधानी बनाने का श्रेय भी भाजपा की सरकार व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को ही जाता है। 
स्थायी राजधानी की राह में क्या क्या हुआ
– केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित न कर भूल की
– फैसला पहली निर्वाचित सरकार पर छोड़ा, देहरादून को अस्थायी राजधानी बना दिया
– आयोग में मात्र एक व्यक्ति होने और जरूरी सुविधाओं के अभाव में छह महीने में इस्तीफा दे दिया
– पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने आयोग को विस्तार दिया
– छह साल में आयोग को करीब 11 विस्तार- अंतरिम सरकार ने राजधानी तय करने के लिए एक सदस्यीय आयोग बना दिया, छह महीने में रिपोर्ट मांगी
दिए, तब जाकर रिपोर्ट आई
– तब से गैरसैंण में विस भवन बन गया, ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित हो गई, लेकिन स्थायी राजधानी की पहेली अब भी जस की तस है

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!