प्यूली के फूलों से लदे उत्तराखण्ड के पहाड़ , प्यूली है सुख समृधि का सूचक
फूलदेई उत्तराखंड का लोकप्रिय पर्व है ,साथ ही बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी , माना जाता है की फूलदेई का त्यौहार बिना प्योलीं के फूल के अधूरा ही रह जाता है, क्या है प्योलीं ….
सर्दियों का मौसम जब खत्म होने को होता है तो उत्तराखंड के पहाड़ पीले फूलों से लद जाते हैं, इस फूल का नाम है “प्योली” जब बसन्त ऋतु सबाब पर होती है तब प्यूली का फूल हर पहाड़ी पर खिला नजर आता है ,
सुख-समृद्धि का प्रतीक फूलदेई त्योहार उत्तराखंड की गढ़ कुंमाऊ संस्कृति की पहचान है। बसंत का मौसम आते ही सभी को इस त्योहार का इंतजार रहता है, विशेषकर उत्तराखण्ड के गाँवों में छोटे बच्चों में इस त्योहार के प्रति बहुत उत्सुकता होती है। घर-घर में फूलों की बारिश होती है हर घर सुख-समृद्धि से भरपूर हो इसी भावना के साथ बच्चे अपने घरों के साथ-साथ आस-पास के गांवों में जाकर घरों की दहलीज पर फूल डालकर सभी के लिए सुख सम्रद्धि की मंगलकामना करते हैं , पयोोली अलमोड़ा , पिथौरागढ़ , चखुटिया के आदि ग्राम फुलोरिया समेत पहाड़ी गांवों में यह बहुतायत में खिलता है ।
ज्योतिषाचार्य नवीन जोशी के मुताबिक प्योली का फूल हमारे सुख समृधि का सूचक है ।