कोरोना ने मानवीय संवेदनाओं व सामाजिक तानाबाना को भी चूर चूर किया

वैश्विक महामारी कोरोना ने लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। सुख दुःख के दौरान दिखने वाला सामाजिक ताना बाना व मानवीय संवेदनाओं को भी भी कोरोना ने चूर-चूर कर दिया है। इससे समाज का पूरा ताना-बाना बदल गया है। कोरोना संक्रमित की मौत होने पर शव को कंधा देने में परिजन भी डर रहे हैं। शव यात्रा मे जुटने वाली भीड़ गायब है लोग कोरोना पीड़ित परीवार को फोन तक करने मे डर रहे है स्थिति यहा तक है कि कोविड अस्पतालों के बाहर शवों को भाड़े पर कंधा देने के लिए मजदूर एकत्र होने लगे हैं।
पीपीई किट पहनकर करीबी परिजनों के साथ ये मजदूर मोर्चरी से श्मशान घाट तक जा रहे हैं। कोरोना संक्रमित शव को कई मामलों में अपने भी हाथ लगाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसे मे ये मजदूर पीड़ित परिवार के लिए उस समय किसी फ़रिस्ते से कम नहीं है
जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित मरीज के छींकने से एक से दूसरे के शरीर में पहुंचता है। कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को वार्ड में ही पूरी तरह से कवर किया जाता है। इससे संक्रमण का जोखिम कम रहता है।