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उत्तराखंड

देश में पहली बार कॉर्बेट पार्क में विदेशी दवा से बन्यजीवो को ट्रैंक्यूलाइज कर रेस्क्यू किया गया

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश का पहला ऐसा टाइगर रिजर्व बना  जिसके पास वन्यजीवों को  (काबू) करने के लिए कारगर विदेशी दवा उपलब्ध  है। इस दवाke प्रयोग से  वन्यजीव को ट्रैंक्यूलाइज करने पर वह दो मिनट में ही बेहोश हो जाता है।

जबकि पहले ट्रैंक्यूलाइज करने में कभी कभी अधिक दवा से वन्य जीव की मौत भी हो जाती थी  लेकिन इसी दवा  का प्रयोग करते हुए हाल  में कॉर्बेट पार्क के पशु चिकित्सकों ने एक बाघिन और एक बाघ को ट्रैंक्यूलाइज कर सकुशल राजाजी नेशनल पार्क में छोड़ा है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को मिली यह विदेशी दवा  मैक्सिको और अफ्रीका से आई है।  कॉर्बेट पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि 23 दिसंबर को बिजरानी रेंज में बाघिन और आठ जनवरी को झिरना रेंज के लालढांग में बाघ को रेस्क्यू करने में इस दवा इस्तेमाल किया गया था। भारतीय वन्यजीव संस्थान के पास यह औषधि पहले से ही है।

पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा के अनुसार ये औषधि बेहद कारगर व सुरक्षित है। 23 दिसंबर को ट्रैंक्यूलाइज करने के दो मिनट बाद ही बाघिन बेहोश हो गई थी और फिर रेडियो कॉलर लगाकर एंटीडॉट लगाते ही वह शीघ्र ही होश में भी आ गई।

उन्होंने  बताया कि  जब किसी वन्यजीव को रेस्क्यू करना होता था तो ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद वन्यजीव को बेहोश होने में बीस मिनट तक लग जाते थे। इस दौरान उसके भागने से उसे तलाशना चुनौती भरा होता था, क्योंकि वह झाड़ियों में चला जाता था। और हमलावर भी हो जाता है

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद तीन विदेशी औषधियां मिली हैं। इन औषधियों के साथ उनके एंटीडॉट भी कॉर्बेट को मिले हैं। इन विदेशी दवाओं में एट्रोफाइन का एंटी डोट नेलट्रेक्जोन, मेडीटोमाइडीन का एंटी डोट एटिपएमेजोल और केरविडाइन का एंटी डोट टोलाजोलाइन हैं।

 

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