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उत्तराखंड

स्व.दानिश ख़ान पत्रकारिता अवार्ड गणेश कुकसाल को

हल्द्वानी –  समाज के  दबे कुचले लोगों की आवाज़ को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने वाले  पत्रकार स्व 0 दानिश ख़ान की याद में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तराखंड  द्वारा एक पत्रकार सम्मान समारोह किया जा रहा है. जिसमें  वरिष्ठ  पत्रकार गणेश कुकसाल  ‘गणी’ को इस स्मृति सम्मान से नवाज़ा जायेगा।   पत्रकरीता के क्षेत्र में प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पौड़ी गढ़वाल के पत्रकार, लेखक और कवि गणेश कुकसाल   ‘गणी’ को स्वर्गीय दानिस स्मृति खान सम्मान  दिया जा रहा है.

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव विश्वजीत नेगी ने बताया की यह स्मृति सम्मान, पत्रकार स्वर्गीय दानिश ख़ान की याद में दिया जा रहा है। जिन्होंने कड़े संघर्ष  से श्रमजीवी पत्रकार यूनियन को ऊंचाइयों पर पहुंचाया  उनकी याद में ही यूनियन द्वारा स्मृति समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया गया

गणेश कुकसाल  ‘गणी’ का परिचय

वर्ष 1968 अप्रैल को जन्मे गणेश कुकसाल  ‘गणी’ ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की. वह 1986 से 1989 तक मानव संपदा सप्ताहिक के लिए लेखन करते रहे. इसके बाद 1989 से 1994 तक अमर उजाला के संवाददाता के रूप में काम किया। वर्ष 1994 से 2001 तक दैनिक जागरण में संवादाता रहे. इसके बाद वर्ष 2001 से 2004 तक मासिक पत्रिका उत्तराखंड वाड़ी में कार्यकारी संपादक की भूमिका निभाई।

गणेश कुकसाल ने वर्ष 2001 से राष्ट्रीय सहारा, सहारा समय, साप्ताहिक के लिए स्वतंत्र लेखन करते रहे. पौड़ी गढ़वाल में अगस्त 2004 से आकाशवाणी, प्रसार भारती में अंशकालिक संवाददाता रहे. 2018 से संवाद प्रेषण की भूमिका निभा रहे हैं. गणेश खुगशाल ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में 1997 से 2001 तक अध्यापन भी किया है.

उनको अपनी पत्रकारिता के कौशल और कार्यशैली की वजह से 1994 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश स्तर पर बेस्ट रिपोर्टिंग के लिए भी चुना गया था। वर्ष 2015 का गोविंद चातक लोक संस्कृति सम्मान व वर्ष 2018 का कन्हैया लाल डंडरियाल लोकभाषा सम्मान सम्मान, 2019 में लोक भाषा के लिए यूथ आईकॉन सम्मान, स्मृति सम्मान से सम्मानित होने वाले गणेश खुगशाल ‘गणी’ ‘धाद गढ़वाली मासिक’ का संपादन कर रहे हैं.

गणेश कुकसाल ‘गणी’ की सामाजिक क्षेत्र में भी सहभागिता रहती है। जिनमें प्रमुख रूप से उत्तराखंड राज्य आंदोलन व कन्या भ्रूण हत्या निवारण अभियान में राज्य संदर्भ व्यक्ति और लोक भाषा आंदोलन में सक्रिय रहे हैं।

‘हमारा उत्तराखंड’ पुस्तक संकला का संपादन महिलाओं पर केंद्रित प्रतिनिधि कविता संकलन ‘आधा संसार’ का संपादन ‘अक्षत’ लोक गायक गीतकार नरेंद्र सिंह नेगी का गढ़वाली गीत संगीत में योगदान ‘अक्षत’ डॉक्टर गोविंद चातक का गढ़वाली लोक साहित्य संस्कृति में योगदान, उत्तराखंड के मेले और उत्सव परंपरा पुस्तक ‘पहाड़ और पहाड़’ का संपादन भी किया है.

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