सरकार का पहाड़ प्रेम : ग्रीष्मकालीन राजधानी पहाड़ में और निदेशालय दून में
सरकार का यह कैसा पहाड़ प्रेम है जो आम जान के समझ से परे है, एक तरफ गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया गया है, दूसरी तरफ पहाड़ में स्थापित मुख्य संस्थानों को मैदानों में या देहरादून में शिफ्ट किया जा रहा है। जबकि तत्कालीन उत्तरप्रदेश राज्य मे महत्वपूर्ण विभागों के निदेशालय पहाड़ों में ही स्थापित किए गए थे। शिक्षा विभाग, रेशम विभाग, खादी बोर्ड, कृषि विभाग का निदेशालय पर्वतीय विकास मंत्रालय के अधीन नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी में स्थापित किए गए थे।
उत्तराखंड पृथक राज्य आंदोलन के पीछे अवधारणा यही थी कि विकास से पिछड़ रहे पर्वतीय क्षेत्र का विकास हो लोगो को पहाड़ मे ही राजगार मिले पहाड़ से पलायन रुके लेकिन राज्य बनने के बाद सबसे अधिक दुर्गति पहाड़ों की हो रही है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सभी महत्वपूर्ण निदेशालय पहाड़ों से हटाकर देहरादून में ले जाए जा रहे हैं।
एक तरफ सरकार गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर सभी विभागों के निदेशालय देहरादून स्थानांतरित किए जा रहे हैं। आम जन को स्वास्थ शिक्षा रोजगार के लिए पहाड़ छोड़ मैदान आना पड़ता है इससे पहाड़ की अर्थव्यवस्था भी कमजोर होती है व पलायन भी बदता है